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Lord GaneshaTraditional Sanatan
श्री गणेश आरती (सुखकर्ता दुखहर्ता / जय गणेश देवा)

विघ्नहर्ता मंगलमूर्ति प्रथम पूज्य सम्पूर्ण आरती

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तत्त्व दर्शन एवं सार: Invoking Lord Ganesha removing all hurdles and ushering in peace and prosperity.

सम्पूर्ण आरती पद व भावार्थ

3 श्लोक / पद
ध्रुवपद (जय गणेश देवा)
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा... ॥
🌺 प्रमाणिक हिन्दी भावार्थ

हे भगवान श्रीगणेश! आपकी जय हो, जय हो। जिनकी माता पार्वती और पिता देवाधिदेव महादेव हैं।

पद १-२
एक दन्त दयावन्त चार भुजा धारी ।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी ॥
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥
🌺 प्रमाणिक हिन्दी भावार्थ

एक दन्त वाले, दयालु, चार भुजाओं वाले, मस्तक पर तिलक और मूषक की सवारी करने वाले प्रभु! आपको पान, फूल, मेवे और लड्डुओं का भोग लगता है तथा सन्तजन आपकी सेवा करते हैं।

पद ३-४
अन्धन को आंख देत कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया ॥
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा ।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥
🌺 प्रमाणिक हिन्दी भावार्थ

आप नेत्रहीनों को दृष्टि, रोगियों को निरोगी काया, सन्तानहीनों को पुत्र और निर्धनों को धन-सम्पदा प्रदान करते हैं। हम आपकी शरण में आए हैं, हमारी सेवा को सफल कीजिए।